Sunday, September 20, 2009
कोई अपना-डा. प्रमोद कुमार
तुम्हे देखा तो जिंदगी, जीने को मचल गई
तुम्हें पाया तो जिंदगी, एक दर्द बन गई
और जाना तो, जीने की तमन्ना निकल गई ।
लोग चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं,
तुम हो कि चेहरों को पढ़ा करते हो;
पल, पल बदलते चेहरों के इस शहर में
तुम हो कि कोई अपना ढूढ़ॉ करते हो ।
लोग झूठे पे कई झूठ बोल लेते हैं,
तुम हो कि बातों में यकीं करते हो;
झूठ को सच्च साबित करने वालों में,
तुम हो कि कोई सच्चा ढ़डंढा करते हो ।
वफ़ा की बात कर जो बेवफ़ाई करते हैं,
वो बस खुद के लिए जीते हैं, मरते हैं;
हजारों ख़ाहिशो हो जिनकी अपनी,
तुम उनसे क्यों उम्मीदें किया करते हो ।
जलाकर ख़ाक कर देंगे तेरे दिल को,
प्यार से हाथ मौहब्बत का बढ़ा न देना;
लूट लेंगे उल्फत के गमों की दौलत भी,
कभी इनको दिल में बसा न लेना ।
बेगानों में अपना ढूढ़नें वाले इंसा,
चेहरों को नहीं दिल को पढ़ा करते हैं;
चमकते गुलिस्ता में असली फूलों को,
चमक से नहीं महक से परखा करते हैं ।
तुम्हे देखा तो जिंदगी, जीने को मचल गई
तुम्हें पाया तो जिंदगी, एक दर्द बन गई
और जाना तो, जीने की तमन्ना निकल गई ।
लोग चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं,
तुम हो कि चेहरों को पढ़ा करते हो;
पल, पल बदलते चेहरों के इस शहर में
तुम हो कि कोई अपना ढूढ़ॉ करते हो ।
लोग झूठे पे कई झूठ बोल लेते हैं,
तुम हो कि बातों में यकीं करते हो;
झूठ को सच्च साबित करने वालों में,
तुम हो कि कोई सच्चा ढ़डंढा करते हो ।
वफ़ा की बात कर जो बेवफ़ाई करते हैं,
वो बस खुद के लिए जीते हैं, मरते हैं;
हजारों ख़ाहिशो हो जिनकी अपनी,
तुम उनसे क्यों उम्मीदें किया करते हो ।
जलाकर ख़ाक कर देंगे तेरे दिल को,
प्यार से हाथ मौहब्बत का बढ़ा न देना;
लूट लेंगे उल्फत के गमों की दौलत भी,
कभी इनको दिल में बसा न लेना ।
बेगानों में अपना ढूढ़नें वाले इंसा,
चेहरों को नहीं दिल को पढ़ा करते हैं;
चमकते गुलिस्ता में असली फूलों को,
चमक से नहीं महक से परखा करते हैं ।
