Sunday, September 20, 2009
धुँए का बादल-डा. प्रमोद कुमार
गवा बैठे तम्मना में जिनकी
एक उम्र इंतजार करके,
अरमानों के सूने घर में
हर आहट बैगानी निकली ।
कहते थे बस तुम्हें चाहते हैं
और कोई भी चाहत नहीं है,
झ्ूाठे वादे प्यार मौहब्बत
हर कस्में बेईमानी निकली ।
बिन संग तुम्हारे न जी सकेंगे
और हम न मर सकेंगे
हरेक चाल एक धौका
हर बात लाईमानी निकली ।
दिल ने जब नज़दीक से देखा
ये सूरत भी अनजानी निकली
कस्में वादे प्यार वफा सब
बातें जो बेईमानी निकली
साथी
खाली-खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।
तेरे नयनों की गहराई में
एक प्यार भरा सागर देखा,
तेरे होठॅेंों की नरमाई में
एक अमृत का गागर देखा ।
प्यास भरे इस चित मन को
तुमसा साकी नहीं मिलेगा;
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
तेरी प्यार भरी ऑखों में
अहसास भरा सपना देखा,
तेरी हर मुलाकातों में
चेहरा जो अपना देखा ।
नकली चेहरों की दुनिया में
तुम सा अपना नहीं मिलेगा,
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
तेरी सॉसों की गरमाई में
सृजन होता जीवन देखा,
पलकों में तेरी छूपा हुआ
प्यार भरा मंजर देखा ।
जो सपनों को साकार बना दे
ऐसा साथी नहीं मिलेगा,
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
कोमल से तेरे अंगों में
भीगा सा सावन देखा,
प्यार भरे तेरे मन में
वफ़ाओं भरा चितवन देखा ।
सूखे बन में फूल खिला दे
ऐसा मौसम नहीं मिलेगा;
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
मेरे पथ के सूनेपन में
जीने का अहसास जगा दे,
तन्हां से इस जीवन में
अपनापन महसूस करा दें ।
जीवन नौका को इस तूफ़ा में
तुमसा मॉझी नहीं मिलेगा,
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
जन्नत
जन्नत बनाना चाहते थे
इस धरा को प्यार से,
पर इसे, नफरत फैलाकर
दोज़ख़ बनाके रख दिया ।
निज स्वार्थपूर्ति के लिए
देव-धर्म की बातें करके,
कुछ लोभी मक्कारों ने इसे
नरक बना के रख दिया ।
ख़ुदा का नाम लेने वाले जो
मन में पाप लिए होते हैं,
रोज़ बदलते चेहरों ने इसको
कलुषित करके रख दिया ।
पाक रखना चाहते थे
हर बहती धारा को,
पर पापियों ने इसको
प्रदूषित करके रख दिया ।
मैं हूॅ औैर सब मेरा है
ऐसे कुछ शैतानों ने,
शोषण कर कर के इसको
दुषित करके रख दिया ।
सीधे-साधे लोगों से
निराधार बाते करके,
बेईमान लोगों ने इसको
घृणा से भरके रख दिया ।।
Email: drpramod.kumar@yahoo.in
गवा बैठे तम्मना में जिनकी
एक उम्र इंतजार करके,
अरमानों के सूने घर में
हर आहट बैगानी निकली ।
कहते थे बस तुम्हें चाहते हैं
और कोई भी चाहत नहीं है,
झ्ूाठे वादे प्यार मौहब्बत
हर कस्में बेईमानी निकली ।
बिन संग तुम्हारे न जी सकेंगे
और हम न मर सकेंगे
हरेक चाल एक धौका
हर बात लाईमानी निकली ।
दिल ने जब नज़दीक से देखा
ये सूरत भी अनजानी निकली
कस्में वादे प्यार वफा सब
बातें जो बेईमानी निकली
साथी
खाली-खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।
तेरे नयनों की गहराई में
एक प्यार भरा सागर देखा,
तेरे होठॅेंों की नरमाई में
एक अमृत का गागर देखा ।
प्यास भरे इस चित मन को
तुमसा साकी नहीं मिलेगा;
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
तेरी प्यार भरी ऑखों में
अहसास भरा सपना देखा,
तेरी हर मुलाकातों में
चेहरा जो अपना देखा ।
नकली चेहरों की दुनिया में
तुम सा अपना नहीं मिलेगा,
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
तेरी सॉसों की गरमाई में
सृजन होता जीवन देखा,
पलकों में तेरी छूपा हुआ
प्यार भरा मंजर देखा ।
जो सपनों को साकार बना दे
ऐसा साथी नहीं मिलेगा,
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
कोमल से तेरे अंगों में
भीगा सा सावन देखा,
प्यार भरे तेरे मन में
वफ़ाओं भरा चितवन देखा ।
सूखे बन में फूल खिला दे
ऐसा मौसम नहीं मिलेगा;
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
मेरे पथ के सूनेपन में
जीने का अहसास जगा दे,
तन्हां से इस जीवन में
अपनापन महसूस करा दें ।
जीवन नौका को इस तूफ़ा में
तुमसा मॉझी नहीं मिलेगा,
खाली खाली से जीवन को
तुमसा साथी नहीं मिलेगा ।।
जन्नत
जन्नत बनाना चाहते थे
इस धरा को प्यार से,
पर इसे, नफरत फैलाकर
दोज़ख़ बनाके रख दिया ।
निज स्वार्थपूर्ति के लिए
देव-धर्म की बातें करके,
कुछ लोभी मक्कारों ने इसे
नरक बना के रख दिया ।
ख़ुदा का नाम लेने वाले जो
मन में पाप लिए होते हैं,
रोज़ बदलते चेहरों ने इसको
कलुषित करके रख दिया ।
पाक रखना चाहते थे
हर बहती धारा को,
पर पापियों ने इसको
प्रदूषित करके रख दिया ।
मैं हूॅ औैर सब मेरा है
ऐसे कुछ शैतानों ने,
शोषण कर कर के इसको
दुषित करके रख दिया ।
सीधे-साधे लोगों से
निराधार बाते करके,
बेईमान लोगों ने इसको
घृणा से भरके रख दिया ।।
Email: drpramod.kumar@yahoo.in
