Sunday, September 20, 2009

 
चॉद तुम आ जाओं न-डा. प्रमोद कुमार






चॉद तुम आ जाओ न ।

फूल की पंखुड़ि‍यों की
सेज़ पर है जो पली,
मस्त पवन के साथ जो
खेलती हुई बड़ी,
पल्लवों के गीत में
संगीत सी है जो बसी,
खुशबू वही आज प्यार से
पूकारती है चॉद को

चॉद तुम आ जाओं न ।

शीतल नमी बूंदों से
काया है जि‍सकी बनी,
संतरंगी श्रृंगार कर जो
नीली चुनरि‍यों से सजी,
बादलों के बीच जो
इठलाती सी चली,
बदली वही आज प्यार से
पूकारती है चॉद को

चॉद तुम आ जाओं न ।
Emial: drpramod.kumar@yahoo.in

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