Tuesday, March 22, 2011
और मैं इकरार करता रहा: डा. प्रमोद कुमार
और मैं इकरार करता रहा
इंतज़ार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
प्यार के इकरार मैंने
हर चाँदनी , हर किरन के हाथों भेजे
लेकिन तुम चाँद देखते रहे
सूरज निहारते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
जीवन भरे अहसास मैंने
हर धुन , हर शब्द के हाथों भेजे
लेकिन तुम साज देखते रहे
आवाज सुनते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
स्वार्थहीन समर्पण मैंने
हर ख़ुशबू , हर सन्तुष्टि के हाथों भेजे
लेकिन तुम फूल देखते रहे
कामना करते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
संदेश भरे नमस्कार मैंने
हर आत्मा , हर धड़कन के हाथों भेजे
लेकिन तुम शरीर निहारते रहे
दिलों से खेलते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
दीदार की हसरतें मैंने
हर रोशनी , हर क्षण के हाथों भेजी
लेकिन तुम दीप देखते रहे
समय से पूछते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
आशा भरे विचार मैंने
हर अनुभूति, हर तपन के हाथों भेजे
लेकिन तुम सुख - ख़ुमार में रहे
आग सेकते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
डा. प्रमोद कुमार
Email: drpk1956@gmail.com
drpramod.kumar@yahoo.in
और मैं इकरार करता रहा
इंतज़ार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
प्यार के इकरार मैंने
हर चाँदनी , हर किरन के हाथों भेजे
लेकिन तुम चाँद देखते रहे
सूरज निहारते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
जीवन भरे अहसास मैंने
हर धुन , हर शब्द के हाथों भेजे
लेकिन तुम साज देखते रहे
आवाज सुनते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
स्वार्थहीन समर्पण मैंने
हर ख़ुशबू , हर सन्तुष्टि के हाथों भेजे
लेकिन तुम फूल देखते रहे
कामना करते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
संदेश भरे नमस्कार मैंने
हर आत्मा , हर धड़कन के हाथों भेजे
लेकिन तुम शरीर निहारते रहे
दिलों से खेलते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
दीदार की हसरतें मैंने
हर रोशनी , हर क्षण के हाथों भेजी
लेकिन तुम दीप देखते रहे
समय से पूछते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
आशा भरे विचार मैंने
हर अनुभूति, हर तपन के हाथों भेजे
लेकिन तुम सुख - ख़ुमार में रहे
आग सेकते रहे
और मैं इकरार करता रहा
इंतजार करता रहा
प्यार के स्वीकार का ।
डा. प्रमोद कुमार
Email: drpk1956@gmail.com
drpramod.kumar@yahoo.in
