Saturday, April 09, 2011

 
रेत का दरि‍या-डा. प्रमोद कुमार




एक ख्वाब जो देखा था

हसरत थी मेरे दि‍ल की

दो रेत का दरि‍या था

एक धुंध का बादल था ।



हम उम्र गुजार बैठे

जि‍नकी तमन्ना करके

वो रात का मंज़र था

एक धुएँ का आँचल था ।





हर पल जि‍नका चाहा

सब कुछ छोड़ अपना

पानी पे चि‍त्र था वो

बालू का एक महल था ।





एक ख्वाब जो देखा था

हसरत थी मेरे दि‍ल की

वो रेत का दरि‍या था

एक धुंध का बादल था ।

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Email:drpramod.kumar@yahoo.in

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