Saturday, April 09, 2011
नक्षत्र - -डा. प्रमोद कुमार
तुम चाँद तो होगे
लेकिन जब भी तुम्हें
इस हदय -व्योम में
मन की आँखों से देखा
अपने एक प्रभाकर को
छुपाते हुए देखा
ग्रहण लगाते हुए देखा ।
तुम सूर्य तो होगे
लेकिन जब भी तुम्हें
यौवन की हर सुबह को
अलसाई आँखों से देखा
अपने एक नक्षत्र को
छुपाते हुए देखा
मिटाते हुए देखा ।
तुम नक्षत्र तो होगे
लेकिन जब भी मैंने
इस फैले नभ - मंडल को
सूनी रातों में देखा
तुम्हें एक नीच राशि में
आते हुए देखा
उसे चमकाते हुए देखा ।
--------------
Emai: drpramod.kumar@yahoo.in
तुम चाँद तो होगे
लेकिन जब भी तुम्हें
इस हदय -व्योम में
मन की आँखों से देखा
अपने एक प्रभाकर को
छुपाते हुए देखा
ग्रहण लगाते हुए देखा ।
तुम सूर्य तो होगे
लेकिन जब भी तुम्हें
यौवन की हर सुबह को
अलसाई आँखों से देखा
अपने एक नक्षत्र को
छुपाते हुए देखा
मिटाते हुए देखा ।
तुम नक्षत्र तो होगे
लेकिन जब भी मैंने
इस फैले नभ - मंडल को
सूनी रातों में देखा
तुम्हें एक नीच राशि में
आते हुए देखा
उसे चमकाते हुए देखा ।
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